चाहत आग लगाए

देर लगी आनें में तुमको
शुक्र है फिर भी आए तो,
आस ने दिल का साथ ना छोड़ा
वैसे हम घबराए तो.....
झूठ है सब तारीख हमेशा,
अपने को दोहराती है,
अच्छा मेरा ख्वाब-ए-जवानी
थोडा सा दोहराए तो.....
सुनीं सुनाई बात नहीं है.
अपने ऊपर बीती है,
फूल निकलतें हैं शोलों से,
चाहत आग लगाए तो.....