पहचाना क्या...?

एक बूढ़े बाबा बीमार हो गए
खाट पकड़ ली।
अच्छी तरह आंख भी नहीं
खुल रही थी।
--
--
गांव की लुगाईयां देखने को
आईं...
बूढ़े बाबा की घरवाली बोली...
सुनो कौन आया देखो तो
पहचानो ज़रा?
--
--
बाबा ने जैसे-तैसे आंख खोली
व उन लुगाईयों को देख फिर
घरवाली की तरफ देखता हुआ
मनमन में बोला...
--
--
भरी जवानी में इनकी तरफ देखने
तक नहीं दिया।
और अब मरने का टाइम आया
तब मनहूस पूछ रही है कि
पहचाना क्या...?