रुक जाती है कलम

लिख सकता हुं उस अंजान को
सुबह से सांझ तक शायरी "मै"
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रुक जाती है कलम लिखते-2 भीग जाते हैं..
अल्फाज आंसू ही इतने गिर पडते हैं डायरी में