बस मैं और मेरी तन्हाईयाँ

रोने दे कुछ पल मुझको ये आंसू अच्छे लगते हैँ कभी कभी ये गम के बादल भी कुछ अपने लगते हैं हँसना मेरा सबने देखा जो मेरी पहचान है पर छुप छुप के हूँ कितना रोया इस बात से सब अनजान हैं रात की छाया ले आई जब तन्हाई उदासी सी कुछ उमड़ आई सहसा ढलका आँख का पानी आंसू बन के बहता गया कोई न यहाँ जग है तन्हा हैं बस मैं और मेरी तन्हाईयाँ साथ मेरा देते हैं आंसू छाईं हैं वीरानियाँ